अवलोकन

जलवायु परिवर्तन वास्तविकता बन चुका है और सामने दिखाई देने लगा है – पूरी दुनिया में लोगों का जीवन इससे प्रभावित हो रहा है. यह खेती, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका के लिए बड़ी चुनौती है. जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल (आईपीसीसी) ने अगस्त 2021 में जारी अपनी छठी रिपोर्ट में जलवायु परिवर्तन के कारण पूरी मानवता के लिए रेड अलर्ट जारी किया है. कमजोर समूहों के लिए जलवायु परिवर्तन “जोखिम को कई गुना बढ़ाने वाले कारक” के रूप में काम करता है और विद्यमान सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और पर्यावरणीय दबावों को और बदतर बना देता है. आईपीसीसी कार्य समूह II (डब्ल्यूजी II) ने निर्दिष्ट किया है कि अनुकूलन और शमन दोनों के लिए तत्काल कार्रवाई शुरू करने की आवश्यकता है.

वैसे तो जलवायु परिवर्तन का प्रभाव पूरे विश्व पर पड़ने वाला है लेकिन भारत जैसे देशों पर ज्यादा असर पड़ने की सम्भावना है क्योंकि इन देशों की बहुत बड़ी आबादी कृषि पर निर्भर है और कृषि अंततः मौसमी मानसून पर निर्भर है. भारत के सामने जलवायु परिवर्तन के बढ़ते वैश्विक खतरे के बीच तेज आर्थिक वृद्धि को बनाए रखने की चुनौती है. भारत ने पहले ही वैश्विक जलवायु चुनौती से जूझने में सहयोग की प्रतिबद्धता दर्शाई है और भारत सरकार ने जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चिंताओं के निवारण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है.

सरकार ने जून, 2008 में राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (एनएपीसीसी) तैयार की जिसके अंतर्गत अनुकूलन और शमन उपायों के माध्यम से जलवायु परिवर्तन से शीघ्र प्रभावित हो जाने की कमजोरी को कम करने के लिए 8 राष्ट्रीय मिशनों का गठन किया गया. एनएपीसीसी के आधार पर राज्य सरकारों और संघराज्य क्षेत्रों ने राज्य जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (एसएपीसीसी) तैयार की जिन्हें राज्यों द्वारा पेरिस करार के अंतर्गत भारत के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) के अनुरूप, और नए सिरे से सामने आई वैज्ञानिक जानकारी के आधार पर पुनरीक्षित किया जा रहा है.

जलवायु परिवर्तन एक संश्लिष्ट नीतिगत मुद्दा है जिसके वित्तीय दृष्टि से बड़े निहितार्थ हैं. जलवायु परिवर्तन के विपरीत प्रभावों को दूर करने के लिए जो भी कार्रवाई और समाधान अपेक्षित हैं उनमें अंततः आर्थिक लागत आनी है. विकासशील देशों में अनुकूलन और शमन परियोजनाओं की रूपरेखा तैयार करने और उन्हें कार्यान्वित करने के लिए निधीयन सर्वाधिक महत्वपूर्ण पहलू है.

नाबार्ड पहले ही जलवायु परिवर्तन के कारण सामने आई चुनौतियों, खास तौर पर कृषि और ग्रामीण आजीविका के क्षेत्र में आई चुनौतियों के निवारण की दिशा में विविध पहलें कर चुका है. नाबार्ड भारत में अनुकूलन और शमन गतिविधियों के लिए राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और निजी क्षेत्र से वित्तपोषण को चैनलाइज़ करता रहा है.

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