जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (यूएनएफसीसीसी) के अंतर्गत अडाप्टेशन फंड

अडाप्टेशन फंड की स्थापना जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (यूएनएफसीसीसी) के क्योटो प्रोटोकोल के अंतर्गत की गई. यह निधि 2001 में स्थापित की गई और मरक्केश, मोरोक्को में 2007 में आयोजित सीओपी 7 में इसे अधिकृत रूप से शुरू किया गया. इसका लक्ष्य क्योटो प्रोटोकोल के पक्षकार विकासशील देशों में कमजोर समुदायों को जलवायु परिवर्तन के प्रति अनुकूलनक्षम बनाने वाली ठोस परियोजनाओं और कार्यक्रमों का वित्तपोषण करना है. इस निधि के लिए वित्त अंशतः सरकारों और निजी दानदाताओं से मिलती है और साथ ही प्रोटोकोल के अंतर्गत क्लीन डेवलपमेंट मेकानिज्म – प्रदूषण-रहित विकास तंत्र (सीडीएम) परियोजनाओं के सर्टिफायड एमिशन रिडक्शन (उत्सर्जन में प्रमाणीकृत कमी) के प्रतिफल का दो प्रतिशत हिस्सा भी इस निधि में शामिल किया जाता है.

अडाप्टेशन फंड का मुख्यालय वाशिंगटन, यूएसए में स्थित है और इसका प्रबंधन अडाप्टेशन फंड बोर्ड (एएफबी) करता है. इस बोर्ड में 16 सदस्य और 16 वैकल्पिक सदस्य हैं और बोर्ड पूरे वर्ष आवधिक बैठकें करता है. विश्व बैंक अंतरिम आधार पर अडाप्टेशन फंड के ट्रस्टी के रूप में काम करता है.

अडाप्टेशन फंड का मुख्यालय वाशिंगटन, यूएसए में स्थित है और इसका प्रबंधन अडाप्टेशन फंड बोर्ड (एएफबी) करता है. इस बोर्ड में 16 सदस्य और 16 वैकल्पिक सदस्य हैं और बोर्ड पूरे वर्ष आवधिक बैठकें करता है. विश्व बैंक अंतरिम आधार पर अडाप्टेशन फंड के ट्रस्टी के रूप में काम करता है.

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार अडाप्टेशन फंड के लिए राष्ट्रीय नामनिर्दिष्ट प्राधिकरण (एनडीए) है और प्रस्ताव एनडीए के अनुसमर्थन के साथ प्रस्तुत किए जाते हैं.

नाबार्ड को जुलाई 2012 में अडाप्टेशन फंड के लिए राष्ट्रीय कार्यान्वयक संस्था (एनआईई) के रूप में प्रत्यायित किया गया है और नाबार्ड भारत के लिए एकमात्र एनआईई है. एनआईई ऐसी राष्ट्रीय विधिक संस्थाएँ होती हैं जिन्हें पक्षकार (क्योटो प्रोटोकोल के) नामित करते हैं जो बोर्ड द्वारा स्थापित न्यासी मानकों की पूर्ति के लिए बोर्ड द्वारा मान्यता-प्राप्त हैं. अडाप्टेशन फंड द्वारा वित्तपोषित परियोजनाओं और कार्यक्रमों के समग्र प्रबंधन का पूरा दायित्व एनआईई पर होता है और उन्हें सभी वित्तीय, अनुप्रवर्तन-सम्बन्धी और रिपोर्ट देने की जिम्मेदारी निभानी होती है. साध्य परियोजनाएँ तैयार करने के उद्देश्य से अनेक कदम उठाए गए है, जैसे राष्ट्रीय स्तर पर संवाद, राज्य-स्तरीय कार्यशालाओं, अपने और साझेदार संस्थाओं के स्टाफ के लिए क्षमता निर्माण कार्यशालाओं का आयोजन करना तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ साझेदारी आदि.

एनआईई की हैसियत में नाबार्ड पात्र कार्यनिष्पादक संस्थाओं, जैसे केंद्र सरकार/ राज्य सरकारों के विभागों, गैर-सरकारी संगठनों, अनुसन्धान संस्थाओं, तकनीकी संस्थाओं आदि द्वारा प्रस्तुत साध्य जलवायु अनुकूलन परियोजनाओं के कार्यान्वयन के लिए अडाप्टेशन फंड बोर्ड से अडाप्टेशन फंड के लिए पहुँच बना सकता है.

अडाप्टेशन फंड बोर्ड ने नियमित प्रत्यक्ष पहुँच परियोजनाओं के अलावा निधीयन की अलग-अलग खिड़कियाँ उपलब्ध कराई हैं. प्रत्यक्ष पहुँच के अंतर्गत भारत को आबंटित राशि बढ़ाकर 20 मिलियन यूएस$ कर दी गई है, जिसमें से 9.86 मिलियन यूएस$ के अनुदान के साथ परियोजनाएँ पहले ही मंजूर की जा चुकी हैं. नाबार्ड पात्र कार्यनिष्पादक संस्थाओं से प्राप्त प्रस्तावों का पक्षपोषण कर रहा है. रुचि रखने वाली संस्थाएँ नाबार्ड के क्षेत्रीय कार्यालयों के माध्यम से अपने संकल्पना नोट/ प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकती हैं.

अडाप्टेशन फंड की निधीयन खिड़कियों के बारे में और अधिक जानकारी https://www.adaptation-fund.org/ से प्राप्त की सकती है.

परियोजना संकल्पनाओं/ प्रस्तावों की संवीक्षा नाबार्ड के क्षेत्रीय कार्यालय और प्रधान कार्यालय द्वारा की जाती है और उन्हें अंतिम रूप देकर पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को भेजा जाता है ताकि मंत्रालय अडाप्टेशन फंड के लिए अपना अनुसमर्थन दे सके. नाबार्ड द्वारा प्रस्तुत संकल्पनाओं/ प्रस्तावों की आरंभिक तकनीकी समीक्षा अडाप्टेशन फंड सचिवालय करता है. अडाप्टेशन फंड की टिप्पणियों के आधार पर अडाप्टेशन फंड बोर्ड के विचारार्थ प्रस्तुत करने के लिए संकल्पनाओं/ प्रस्तावों को पुनरीक्षित किया जाता है. बोर्ड की बैठकें वर्ष में दो बार (अप्रैल और अक्टूबर में) आयोजित की जाती हैं.

यदि संकल्पना को अनुसमर्थन मिल जाता है तो विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने के लिए 30,000 यूएस$ तक का परियोजना निर्माण अनुदान (पीएफजी) उपलब्ध कराया जा सकता है.

अडाप्टेशन फंड बोर्ड के अंतर्गत मंजूर परियोजनाएँ

क्र.सं. परियोजना का नाम राज्य कार्यनिष्पादक संस्था (एँ) परियोजना परिव्यय (रु. करोड़ में)
1 समुद्रतल में वृद्धि के लिए संभावित अनुकूलन रणनीति के रूप में तटीय संसाधनों का संरक्षण और प्रबंधन आंध्र प्रदेश एमएसएसआरएफ 0.69
2 पश्चिम बंगाल के पुरुलिया और बाँका जिलों में लघु और सीमान्त किसानों की अनुकूलन और सहन क्षमता में वृद्धि पश्चिम बंगाल डीआरसीएससी 2.51
3 जलवायु सहन क्षमता और आजीविका सुरक्षा के लिए छोटे अंतर्देशीय मछुआरों में अनुकूलन क्षमताओं का निर्माण मध्य प्रदेश टीएएएल 1.79
4 राजस्थान और तमिलनाडु राज्यों में वाटरशेड विकास परियोजनाओं को जलवायु परिवर्तन-रोधी बनाना तमिलनाडु और राजस्थान कई एजेंसियाँ 1.34
5 कृषि पर निर्भर पर्वतीय समुदायों की संधारणीय आजीविका के लिए पश्चिमोत्तर हिमालयीन क्षेत्र में जलवायु-स्मार्ट कार्रवाई और रणनीतियाँ उत्तराखंड बायफ 0.98
6 कान्हा-पेंच गलियारे में समुदायों, आजीविका और पारिस्थितिकीय संरक्षा के क्षेत्र में अनुकूलन क्षमताओं का निर्माण मध्य प्रदेश रॉयल बैंक ऑफ़ स्कॉटलैंड फाउण्डेशन, इंडिया और मध्य प्रदेश वन विभाग 2.56

जोड़

9.87

ईएसपी और जेंडर (लैंगिक समानता) के लिए तकनीकी सहायता अनुदान

अडाप्टेशन फंड के लिए एनआईई के रूप में नाबार्ड ने भारत में परियोजनाओं और कार्यक्रमों के भीतर पर्यावरणीय, सामाजिक और लैंगिक जोखिमों के आकलन और प्रबंधन के लिए तकनीकी सहायता प्राप्त करने हेतु तकनीकी सहायता अनुदान लिया है. तकनीकी सहायता का लक्ष्य अडाप्टेशन फंड परियोजनाओं के लिए परियोजना के स्तर पर पर्यावरणीय और सामाजिक संरचना को परिचालन में लाने तथा उनके अनुप्रवर्तन और मूल्यांकन को मजबूती देना, और नाबार्ड के स्तर पर रिपोर्टिंग को सुदृढ़ बनाना है. तकनीकी सहायता के एक भाग के रूप में एक टूलकिट विकसित किया गया है ताकि पर्यावरणीय, सामाजिक और लैंगिक पहलुओं से सम्बंधित जानकारी को संगठित, संरचित और विश्लेषित करने, उनके प्रयोग में निरंतरता बनाए रखने और विश्लेषण तथा आकलन में कमियों से बचने में सहयोग मिले.

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